आनंद से जियो , हर सांस प्रति श्वांस
क्यूँ लेती हो उष्ण उसाँस
कृष्णा को जपो , भगवत गीता का आधार ले
जीवन के सार तत्व को समझो
कर्म रथ पर आरूढ़ रहो
ईश्वर को लगे सार्थक तुम्हारा सृजन
और संसार को याद रहे
एक रौशनी थी
अन्यत्र को
रोशन करने चली गई .......
सार्थक जीवन मंत्र
असंतुलित और भयभीत मन
कथनी में करनी को छिपा लेता है
लेकिन करनी छिप नहीं पाती
और फिर कथनी
धीरे धीरे
व्यक्ति को अविश्वसनीय बना देती है
कथनी और करनी का महत्व
अलग अलग है
दोनों में साम्य होना
जीवन को सार्थक बना देता है
सार्थक न हुआ
तो जन्म धारण ही
निरर्थक हो जात्ता है
संसार को समझने के लिए
सच कहने का साहस
होना ही चाहिए
विवेक होता सब में है
उसे प्रयत्नपूर्वक
पहचान ने की आवश्यकता होती है
आत्मा तक पहुँचने का
एक रास्ता
विवेक से होकरजाता है
जो कुछ विवेक पूर्वक
किआ जाएगा
उसे कहने में भी
विवेक रहेगा ही
फिर कभी
कथनी और करनी में
अंतर न होगा
कथनी और करनी की एकरूपता
प्रेम और विश्वास को जन्म देती है
अपनेप्रति
और दूसरों के प्रति भी
सच्चे , सार्थक और संतुलित
जीवन का यही मंत्र है।
क्यूँ लेती हो उष्ण उसाँस
कृष्णा को जपो , भगवत गीता का आधार ले
जीवन के सार तत्व को समझो
कर्म रथ पर आरूढ़ रहो
ईश्वर को लगे सार्थक तुम्हारा सृजन
और संसार को याद रहे
एक रौशनी थी
अन्यत्र को
रोशन करने चली गई .......
सार्थक जीवन मंत्र
असंतुलित और भयभीत मन
कथनी में करनी को छिपा लेता है
लेकिन करनी छिप नहीं पाती
और फिर कथनी
धीरे धीरे
व्यक्ति को अविश्वसनीय बना देती है
कथनी और करनी का महत्व
अलग अलग है
दोनों में साम्य होना
जीवन को सार्थक बना देता है
सार्थक न हुआ
तो जन्म धारण ही
निरर्थक हो जात्ता है
संसार को समझने के लिए
सच कहने का साहस
होना ही चाहिए
विवेक होता सब में है
उसे प्रयत्नपूर्वक
पहचान ने की आवश्यकता होती है
आत्मा तक पहुँचने का
एक रास्ता
विवेक से होकरजाता है
जो कुछ विवेक पूर्वक
किआ जाएगा
उसे कहने में भी
विवेक रहेगा ही
फिर कभी
कथनी और करनी में
अंतर न होगा
कथनी और करनी की एकरूपता
प्रेम और विश्वास को जन्म देती है
अपनेप्रति
और दूसरों के प्रति भी
सच्चे , सार्थक और संतुलित
जीवन का यही मंत्र है।
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Delete. Is 09598011885 कुमुदजी