जितने चंचल हो तुम उससे
क्या काम चंचल मेरा जीवन है
जितना दुखमय हो तुम उससे
क्या किंचित भी कम मेरा मन है
दुःख में सब हैं एक तुम भी हो
जो कभी कभी पीड़ा सहते हो
कल जिन कलियों के अंक बीच
लेकर तुमने दुलराया था
कल जिन सुमनों की डाल डाल पर
हंसकर जी बहलाया था
वे अब ना रहे तो क्यों उनकी
चिंता में यूँ रोते रहते हो
यह व्यथा ईश्वर दान जगत में
जन जन को सब जड़ चेतन को
सबके जीवन में एक बार, मुस्कान
रुदन भी कातर मन को
मत हो अधीर सब दर्द सहो
यह प्रश्न नहीं तुम क्यों दहते हो। …
क्या काम चंचल मेरा जीवन है
जितना दुखमय हो तुम उससे
क्या किंचित भी कम मेरा मन है
दुःख में सब हैं एक तुम भी हो
जो कभी कभी पीड़ा सहते हो
कल जिन कलियों के अंक बीच
लेकर तुमने दुलराया था
कल जिन सुमनों की डाल डाल पर
हंसकर जी बहलाया था
वे अब ना रहे तो क्यों उनकी
चिंता में यूँ रोते रहते हो
यह व्यथा ईश्वर दान जगत में
जन जन को सब जड़ चेतन को
सबके जीवन में एक बार, मुस्कान
रुदन भी कातर मन को
मत हो अधीर सब दर्द सहो
यह प्रश्न नहीं तुम क्यों दहते हो। …
No comments:
Post a Comment