तुम पर मुझको विश्वास नहीं ……
मैं रोता हूँ अपने घर में
तू डाल डाल पर गाती है
मैं घाव ह्रदय के सहलाता
तू उस पर नमक गिराती है
सुखमय यौवन पा तू हंसती
तुझको जीने की आस नहीं
मैं प्यासा पनघट पर मरता
तू बहती शत शत धारों में
रो रो कर मैं आँहें भरता
तू खोई मौन विचारों में
रुक कर सुन ले गाथा मेरी
तुझको इतना अवकाश नहीं
मैं सिसक सिसक मरता निशि में
तुम नभ में आकर इठलाती
मैं मौत मांगता प्रभु से तुम
तुम तारों के संग मिलकर गाती
तूम करते अट्टहास रह रह कर
मेरे अधरों पर हास नहीं
मैं रोता हूँ अपने घर में
तू डाल डाल पर गाती है
मैं घाव ह्रदय के सहलाता
तू उस पर नमक गिराती है
सुखमय यौवन पा तू हंसती
तुझको जीने की आस नहीं
मैं प्यासा पनघट पर मरता
तू बहती शत शत धारों में
रो रो कर मैं आँहें भरता
तू खोई मौन विचारों में
रुक कर सुन ले गाथा मेरी
तुझको इतना अवकाश नहीं
मैं सिसक सिसक मरता निशि में
तुम नभ में आकर इठलाती
मैं मौत मांगता प्रभु से तुम
तुम तारों के संग मिलकर गाती
तूम करते अट्टहास रह रह कर
मेरे अधरों पर हास नहीं
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